विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
बगहा। विकास के दावे जब कागजों से निकलकर जमीन पर उतरते हैं, तो उनकी असलियत कुछ और ही बयां करती है। ताजा मामला बगहा-1 प्रखंड की मझौवा पंचायत का है, जहाँ राधेश्याम उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय, कांटा के बगल में बना खेल मैदान आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।
करोड़ों के शिलान्यास, पर धरातल शून्य
बता दें कि 19 दिसंबर 2014 को मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार और श्री विजय कुमार द्वारा इस खेल मैदान के निर्माण कार्य का शुभारंभ बड़े उत्साह के साथ किया गया था। मनरेगा (MIS NO- AV/20465245) के तहत इस योजना के लिए 9,91,338 की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई थी। इसमें से 9,00,538 सामग्री और ₹90,800 श्रम मद में खर्च दिखाए गए हैं।
गंदगी और उपेक्षा का शिकार
आज स्थिति यह है कि लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी यहाँ खिलाड़ियों के पसीने की जगह गंदगी की बदबू फैली हुई है। चारों तरफ कचरे का अंबार लगा है, जिससे स्थानीय युवाओं में भारी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस मैदान को भविष्य के खिलाड़ी तैयार करने थे, वह आज सिर्फ कागजी खानापूर्ति का नमूना बनकर रह गया है।
सवाल प्रशासन से
क्या क्रियान्वयन एजेंसी (ग्राम पंचायत) और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी सिर्फ बोर्ड लगाने तक सीमित है? स्थानीय जनता अब प्रशासन से जवाब और इस मैदान के जीर्णोद्धार की मांग कर रही है।
इस बाबत पूछे जाने पर बोले मुखिया
इस पूरे मामले पर मझौवा पंचायत के मुखिया रुदल मुसहर ने सफाई देते हुए बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आगमन की संभावना को देखते हुए इस खेल मैदान में हेलीपैड बनाने के लिए कुछ सामग्री हटाई गई थी। हालांकि मुख्यमंत्री का दौरा नहीं हो सका। इसके बाद किसी तरह सामग्री को पुनः लगाया गया। उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में विधायक और सांसद को अवगत करा दिया गया है। गंदगी के सवाल पर मुखिया ने कहा कि खेल मैदान मूल रूप से स्कूल परिसर में बनना था, लेकिन विद्यालय प्रशासन द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने के कारण इसे सरेह (खुले क्षेत्र) में बनाना पड़ा। इसी वजह से वहां गंदगी फैल रही है।






