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शास्त्रीनगर–बेलवनिया गंडक पुल का स्थगन, बगहा के विकास पर बड़ा सवाल

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विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार


बगहा (पश्चिम चंपारण): बगहा के विकास और सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण प्रस्तावित शास्त्रीनगर (बगहा)–बेलवनिया (छितोनी) गंडक पुल के निर्माण कार्य के स्थगन ने क्षेत्रवासियों में गहरी निराशा और आक्रोश पैदा कर दिया है। इसे बगहा के समग्र विकास पर एक करारा प्रहार माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह फैसला न केवल विकास की गति को रोकने वाला है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि बगहा के हितों की अनदेखी की जा रही है।
बगहा को लंबे समय से बीजेपी का गढ़ माना जाता रहा है, बावजूद इसके विकास के इस अहम मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। आखिर क्यों बगहा के भविष्य से जुड़े इस बड़े प्रोजेक्ट पर कोई ठोस पहल नहीं हो रही है? क्या बगहा के विकास पर अपनों की ही तिरछी नजर है—यह प्रश्न अब आम जनमानस के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।
स्थानीय बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर जैसे दुर्गम और सीमावर्ती इलाकों में बड़े-बड़े पुल और सुरंगें बनाकर विकास की नई इबारत लिखी जा रही है, तब चंपारण क्षेत्र विशेषकर बगहा में प्रस्तावित गंडक पुल का स्थगन बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि बगहा की आवाज राष्ट्रीय स्तर तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रही है।
गौरतलब है कि लगभग 60 हजार से अधिक आबादी वाला बगहा, जो भविष्य में जिला बनने की ओर अग्रसर है, केवल एक अनुमंडल ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश, नेपाल सीमा, थारू एवं उरांव समाज तथा कई धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में शास्त्रीनगर–बेलवनिया गंडक पुल का निर्माण न केवल यातायात सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि व्यापार, पर्यटन और रोजगार को भी नई दिशा देगा। साथ ही यह पुल गंडक नदी के कटाव से बगहा की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाएगा।
वर्तमान में गंडक नदी पर बने पुल—चौतरवा और मदनपुर–पनियहवा—बगहा से 15 से 20 किलोमीटर दूर स्थित हैं। इस कारण वाहन और यात्री बगहा में ठहरते नहीं हैं, जिससे स्थानीय व्यापार और अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। जानकारों का मानना है कि यदि इसी तरह दूर-दराज के क्षेत्रों में पुलों का निर्माण होता रहा, तो बगहा का विकास ठहर जाएगा।
तुलना करें तो उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र सोहगीबरवा–नौरंगिया, जहां आबादी महज डेढ़ हजार के आसपास है, वहां योगी सरकार द्वारा 62 करोड़ रुपये की लागत से पुल का निर्माण कराया जा रहा है। वहीं, लगभग दो से ढाई लाख लोगों को जोड़ने वाला बगहा का शास्त्रीनगर–बेलवनिया गंडक पुल अधिक खर्च का हवाला देकर स्थगित कर दिया गया, जो किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं ठहराया जा सकता।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि अब समय आ गया है जब बगहा की जनता को नेताओं पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं आगे आकर जनआंदोलन के माध्यम से अपनी आवाज बुलंद करनी होगी। जयप्रकाश नारायण की धरती से निकली यह मांग अब और तेज हो रही है कि बगहा को पिछड़ने नहीं दिया जाए।
स्थानीय लोगों ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से मांग की है कि शास्त्रीनगर (बगहा)–बेलवनिया (छितोनी) गंडक पुल के निर्माण को शीघ्र स्वीकृति दी जाए, साथ ही मदनपुर–पनियहवा सड़क को दुरुस्त कर बगहा के विकास में केंद्र सरकार निर्णायक भूमिका निभाए।
बगहा की जनता का स्पष्ट संदेश है—अब आवाज दिल्ली तक पहुंचानी होगी, ताकि बगहा का भविष्य सुरक्षित और समृद्ध बन सके।

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