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महिला ने सीजीएसटी अधिकारी पर यौन शोषण व धमकी के लगाए गंभीर आरोप

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मीरजापुर, सरकारी पद और अधिकार के कथित दुरुपयोग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। सीजीएसटी एवं कस्टम विभाग में सुपरिटेंडेंट पद पर तैनात रहे एक अधिकारी (प्रमोद कु. ति.) पर एक महिला केबल ऑपरेटर ने रिश्वत के नाम पर झांसा देकर दुष्कर्म, लंबे समय तक यौन शोषण, जबरन गर्भपात, जान से मारने की धमकी और फर्जी मुकदमों में फंसाने जैसे संगीन आरोप लगाए हैं। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर हलचल मची हुई है।
पीड़िता के अनुसार, वर्ष 2022 में मीरजापुर में तैनाती के दौरान संबंधित अधिकारी ने मात्र 19 हजार रुपये के जीएसटी बकाये के आधार पर एक लाख रुपये से अधिक का नोटिस जारी किया। नोटिस की स्थिति स्पष्ट करने के लिए जब वह अधिकारी से व्यक्तिगत रूप से मिलने पहुंची, तभी से कथित तौर पर उस पर दबाव बनाया जाने लगा।


रिश्वत मांगने और निजी संपर्क का आरोप


महिला का आरोप है कि अधिकारी ने उसका मोबाइल नंबर लेकर निजी बातचीत शुरू की और टैक्स कम कराने व रसीद उपलब्ध कराने के बदले एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी। इसी बहाने उसे होटल और गेस्ट हाउस में मिलने के लिए बुलाया गया।


बंधक बनाकर दुष्कर्म और डराने का दावा


पीड़िता का कहना है कि एक गेस्ट हाउस में उसे कथित रूप से कमरे में बंद कर जबरन शारीरिक संबंध बनाए गए। विरोध करने पर खुद को उच्च पदस्थ अधिकारी बताते हुए थाने या अदालत जाने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। डर और मानसिक दबाव के चलते उसे वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज सहित अन्य शहरों में बुलाकर कथित तौर पर बार-बार शोषण किया गया।


गर्भवती होने पर जबरन गर्भपात का आरोप


पीड़िता के अनुसार, लगातार कथित शोषण के दौरान वह गर्भवती हो गई, जिसके बाद संबंधित अधिकारी द्वारा जबरन गर्भपात कराया गया। रिश्वत की रसीद मांगने पर कभी नौकरी दिलाने तो कभी अन्य मदद का आश्वासन देकर टालमटोल किया जाता रहा।


एंटी करप्शन की कार्रवाई से बढ़ी गंभीरता


दिनांक 06 दिसंबर 2023 को गोरखपुर–सिद्धार्थनगर क्षेत्र में तैनाती के दौरान एंटी करप्शन टीम ने उक्त अधिकारी को 15 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। आरोपी अधिकारी करीब छह महीने तक जेल में रहा। जमानत पर बाहर आने के बाद पीड़िता से संपर्क समाप्त करने और गाली-गलौज व धमकी देने के आरोप भी लगाए गए हैं।


शिकायत वापस लेने का दबाव और फर्जी मुकदमे का आरोप


पीड़िता का दावा है कि शिकायत वापस लेने के लिए उस पर दबाव बनाया गया। इंकार करने पर अधिकारी की पत्नी (वि. ति.) द्वारा धनबल के सहारे फर्जी मुकदमों में फंसाने और जान से मारने की धमकी दी गई।


पुलिस जांच के बाद मुकदमा दर्ज


पीड़िता द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र पर पुलिस ने जांच की, जिसमें आरोप प्रथम दृष्टया सत्य पाए जाने का दावा किया गया। इसके बाद संबंधित अधिकारी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पीड़िता ने अपनी आपबीती समाचार पत्रों और समाचार चैनलों को भी बताई है।


पूर्व निलंबन और उठते सवाल


सूत्रों के अनुसार, संबंधित अधिकारी पूर्व में लगभग 14 वर्षों तक निलंबित रहा और 2019 में पुनः सेवा में लौटा। इस पूरे प्रकरण ने सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही और महिला सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।


न्याय व्यवस्था पर टिकी निगाहें


यह मामला सिर्फ एक महिला की शिकायत भर नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की भी परीक्षा है जहां पद और प्रभाव के आगे पीड़ित की आवाज दबने के आरोप लगते रहे हैं। अब देखना होगा कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है। हालांकि सूत्रों से मिली इस खबर की पुष्टि के लिए किसी आधिकारिक का बयान सामने नहीं आया है जबकि vyn time ऑनलाइन बेब न्यूज चैनल इस खबर की पुष्टि नहीं करता है महिला द्वारा लगाया गया आरोप निराधार भी साबित हो सकता है। जो  वरीय पदाधिकारी द्वारा सत्यता के जांच का विषय है अब देखना यह है कि क्या इस मामले की जांच एवं पड़ताल होती है या नहीं ।

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