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गुरु ही शिष्य को भगवान के सम्मुख करते हैं- पं०भरत उपाध्यायप

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विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार


बगहा अनुमंडल अंतर्गत मधुबनी प्रखंड स्थित राजकीय कृत हरदेव प्रसाद इंटरमीडिएट कॉलेज मधुबनी के पूर्व प्राचार्य पं०भरत उपाध्याय ने गुरु दर्शन प्राप्त कर कहा कि –
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुर्गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः


‘गु’नाम अंधकार का है और ‘रू’ नाम प्रकाश का है इसलिए जो अज्ञान रूपी अंधकार को मिटा दे उसका नाम गुरु है। गुरु के विषय में एक दोहा बहुत प्रसिद्ध है-
गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागुं पांय।
बलिहारी गुरुदेव की, गोविंद दियो बताय।


गोविंद को बता दिया, सामने लाकर खड़ा कर दिया, तब गुरु की बलिहारी होती है। केवल गुरु बन जाने से, गुरुपना सिद्ध नहीं होता ।अकेले खड़े गुरु की महिमा नहीं है ,महिमा उस गुरु की है जिसके साथ गोविंद भी खड़े हैं। अर्थात जिसने भगवान की प्राप्ति करा दी है।
भारत भूमि देवताओं की भूमि है हिंदू धर्म में गुरु को ईश्वर से भी बढ़कर माना गया है। गुरु द्वारा हमें ज्ञान रूपी प्रकाश से आलोकित किया जाता है।

गुरु द्वारा हमें जीवन के मूलभूत सिद्धातों से परिचित कराया जाता है। गुरु की महत्ता को समझते हुए गुरु के सम्मान में सदैव तत्पर रहना चाहिए।
इस अवसर पर पंडित रविंद्र मणि त्रिपाठी, प्रेम नारायण मणि त्रिपाठी, श्रीनिवास मणि त्रिपाठी सहित सभी पारिवारि जन उपस्थित रहे।

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