अजय कुमार दुबे भारद्धाज गौनाहा पश्चिम चंपारण
मकर संक्रांति का पर्व इस वर्ष 15 जनवरी को मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य जीवन पाण्डेय जी ने बताया कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार संयोग वश इसी दिन तिल द्वादशी भी है। मान्यता है कि माघ मास के कृष्ण द्वादशी को ही भगवान विष्णु के शरीर से तिल की उत्पत्ति हुई थी। इस वर्ष माघ मास तिल द्वादशी और वृद्धि योग की युति होने से इसका महत्व और भी फलदाई बताया जा रहा है। 15 जनवरी को सूर्योदय काल से 8 घंटे दोपहर 1:39 तक स्नान दान का पुण्य काल रहेगा। मकर संक्रांति के दिन सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उनके घर जाते हैं। चूंकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, इसलिए इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति का ही दिन चयन किया था। मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं। इस दिन दान का विशेष महत्व होता है। मकर संक्रांति से प्रकृति भी करवट बदलती है। ज्योतिषाचार्य पंडित जीवन पांडे ने बताया कि इस वर्ष 14 जनवरी को रात में भगवान भास्कर 9:19 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे






