दीपदान तिल दान और पंचांग दान का है विशेष महत्व।
अनिल कुमार शर्मा मझौलिया पश्चिम चंपारण।
मकर का सूर्य-14-01-2026 को रात्रि-9:39 में हो रहा है इसलिए मकर संक्रांति 15/01/2026 को समस्त भारत में मनाया जाएगा। उक्त जानकारी आचार्य विपुल तिवारी ने दी है। उन्होंने बताया कि
पुण्य काल दिन में 1:39 तक रहेगा ।इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाएंगे और उसके बाद विवाह गृह प्रवेश उपनयन संस्कार अष्टयाम इत्यादि शुभ कार्य प्रारंभ हो जाएगा । उन्होंने बताया कि
मकर संक्रांति के दिन स्नान तिल दान दीप दान और विशेष रूप से पंचांग दान का महत्व माना गया है ।विशेष करके पंचांग खरीद कर ब्राह्मणों को लोग दान करते हैं ।और दान में तिल का भी महत्व है । भगवान सूर्य के मकर राशि में प्रवेश ही मकर संक्रांति कहलाता है । बताते चले की पौराणिक काल से ही मकर संक्रांति का पर्व समस्त भारत में बड़े श्रद्धा भाव और धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन संगम में स्नान करना विशेष फलदायक होता है। लेकिन नदी तालाब पोखर झील मन आदि में श्रद्धालु स्नान करते हैं और पूजन अर्चना करते हैं।
आचार्य विपुल तिवारी ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व 15-01-2026 को मनाना उचित है। उन्होंने बताया कि घर पर भी श्रद्धालु शुद्ध जल में गंगाजल और तिल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि मानव को अपने अंदर व्याप्त ईर्ष्या लालच व्यभिचार मोह दुष्ट प्रवृत्तियों को तिलांजलि देकर अपने तन मन को पावन और पवित्र बनाने का संकल्प लेना चाहिए। अपने हृदय के अंदर दीपक की तरह पवित्रता सादगी श्रद्धा सद्भावना ईमानदारी लगनशीलता और ज्ञान का ज्योत जलाने का निरंतर प्रयास रखना चाहिए।
बताते चले की 15 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाने के लिए पंडित मदन मिश्रा आचार्य नागेंद्र तिवारी आचार्य अजय कुमार तिवारी आदि ने भी शास्त्र सम्मत बताया है।






