विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
बगहा, नेपाल और उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे बगहा अनुमंडलीय अस्पताल परिसर में लाखों रुपये की लागत से बनाई गई जल मीनार आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। बीते तीन वर्षों से वार्ड संख्या 28 और 30 के लोग इस मीनार से एक बूंद पानी तक नहीं पा सके हैं। हालात ऐसे हैं कि स्थानीय नागरिकों को पीने का पानी बाजार से खरीदना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासी अशोक दास ने बताया कि जब जलापूर्ति की जिम्मेदारी नगर परिषद के पास थी, तब पानी नियमित रूप से उपलब्ध होता था। लेकिन जैसे ही जिम्मेदारी बुर्डको (बिहार अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) को सौंपी गई, पूरी व्यवस्था ठप हो गई। आज जल मीनार का परिसर घास-फूस से घिरा हुआ है और संरचना जर्जर हालत में पहुंच चुकी है।

गौरतलब है कि बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी ‘हर घर नल का जल’ योजना की शुरुआत वर्ष 2016 में की गई थी, जिसका लक्ष्य 2019-20 तक हर ग्रामीण और शहरी घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था। लेकिन बगहा में यह योजना कागजों तक ही सीमित नजर आ रही है और जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
इस संबंध में बुर्डको के कनीय अभियंता पप्पू कुमार ने बताया कि नगर परिषद ने अब तक जल मीनार का हैंडओवर नहीं लिया है। उनके अनुसार, कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन नगर परिषद की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हुई। अब ‘मेंटेनेंस पीरियड’ भी समाप्त हो चुका है और आगे की कार्रवाई विभागीय स्तर पर लंबित है।
पूरे मामले ने प्रशासनिक लापरवाही और आपसी तालमेल की कमी को उजागर कर दिया है। वार्डवासी सवाल उठा रहे हैं कि क्या जनता के टैक्स से बनी जल मीनार केवल फाइलों की शोभा बढ़ाने के लिए है, या फिर उन्हें कभी शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा नसीब होगी।






