विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार
मधुबनी , स्थानीय ग्राम पिपरपाती बाबू में ठा०रामाधार सिंह के यहां आयोजित साप्ताहिक श्रीमद् भागवत कथा एवं अष्टजाम की पुर्णाहुति के अवसर पर पूर्व प्राचार्य पं०भरत उपाध्याय ने कहा कि भारतीय संस्कृति हमारी धरोहर और पहचान है दुर्भाग्य से नई पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित होकर अपनी संस्कृति भूलती जा रही है, इसी का असर है कि उनके रहन-सहन परिधान देश की संस्कृति से मेल नहीं खा रहे हैं। विभिन्न चैनलों पर संस्कृति को मुंह चिढ़ाते कार्यक्रम और धारावाहिक दिखाएं जा रहे हैं। इन्हें देखकर युवा पीढ़ी मानसिक रूप से अपाहिज होती जा रही है। इस स्थिति को बदलने के लिए सभी को पहल करनी होगी। ऐसे में धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजनों का महत्व बढ़ गया है।भारतीय संस्कृति उत्सवप्रिय है। भारतवर्ष में व्रतों एवं पर्वों की ऐसी निरंतरता है कि कोई भी माह इनसे अछूता नहीं है। जिस देश की संस्कृति अनादि अनंत हो, जहां सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक घटनाओं की बाहुल्यता हो, वहां जीवनोपकारी आयोजनों की निरंतरता स्वाभाविक है। इस तरह से पूर्वजों ने जीवन में उल्लास, उमंग एवं नई ऊर्जा के संचार हेतु अद्भुत व्यवस्था बनाई है।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य संतोष कुमार त्रिपाठी, विपिन बिहारी तिवारी, जवाहर यादव, विनोद सिंह, बबलू सिंह, अजय बहादुर सिंह, सीपू सिंह, मोनू सिंह, विकास सिंह, श्याम बिहारी पांडेय, उमेश सिंह, नीरज सिंह, नवीन राय, गोरख यादव, दिनेश कुमार गुप्ता सहित सैकड़ो लोग उपस्थित होकर प्रसाद ग्रहण किया।






