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जाने कौन है लावारिस दिव्यांग जनों की सेवा में समर्पित पूरा परिवार

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मानव सेवा ही सच्ची सेवा सर्वोत्तम यह काम है

वाल्मीकि नगर से नंदलाल पटेल की रिपोर्ट

भारत नेपाल सीमा पर अवस्थित वाल्मीकि नगर में एक ऐसा भी घर है, जहां हर दिन लावारिस दिव्यांग जन आते हैं और सुबह शाम भोजन ग्रहण करके जाते हैं।जो दिव्यांग अपना नाम बता नहीं सकते, बोलकर अपनी भावनाएं भी व्यक्त नहीं कर सकते, वैसे दिव्यांग जनों का हर दिन किसी खास जगह पर जाकर भोजन करना सचमुच आश्चर्य की बात है। जी हां चौंकिए मत,अंतर्राष्ट्रीय न्यास स्वरांजलि सेवा संस्थान के मैनेजिंग डायरेक्टर संगीत आनंद,संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्षा अंजु देवी और इसके संस्थापक डी.आनन्द को इस नेक काम का श्रेय जाता है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक 14 नवंबर 2012 से भारत नेपाल सीमा पर दैनिक चलंत दरिद्र नारायण भोज की विधिवत् शुरुआत हुई । सड़कों के किनारे जीवन गुजारने वाले ये लावारिस दिव्यांग जन जिनके बारे में यह भी पता नहीं होता कि वे कहां के रहने वाले हैं। ऐसे लोगों की पीड़ा देखकर डी. आनन्द भावुक हो गए। और उन्होंने अपनी संस्था के माध्यम से दैनिक चलंत दरिद्र नारायण भोज मुहिम की शुरुआत की। इस अभियान में घूम-घूम कर, ऐसे भटकने वाले दिव्यांग जनों को संस्था द्वारा फूड पैकेट और भोजन प्रदान किया जाता है। स्वरांजलि सेवा संस्थान के माध्यम से अब तक ऐसे कई भूले भटके लोगों को उनके परिजनों से मिलवाया जा चुका है।

ऐसे लोगों को कपड़े भी प्रदान किए जाते हैं, ताकि मानवता शर्मसार ना हो। संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्षा अंजु देवी ने कहा कि अपने हाथों ऐसे लोगों के लिए शुद्ध शाकाहारी भोजन बनाकर हमें खुशी मिलती है। ऐसे लोगों की सेवा ही सच्ची ईश्वर की सेवा है। एम.डी संगीत आनंद ने कहा कि माता-पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए विगत 13 वर्षों से मैं ऐसे लोगों के बीच स्वयं भोजन वितरण का काम करता हूं। तीन- चार दिव्यांग ऐसे भी हैं जो स्वयं हर दिन हमारे घर सुबह शाम पहुंचते हैं और दरवाजे पर बैठकर भोजन ग्रहण करते हैं। ये भी प्यार की भाषा समझते हैं। आदि कवि महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि वाल्मीकि नगर से इस सामाजिक अभियान की शुरुआत की गई थी।

इस कार्य की सराहना होती गई, सफलता मिलती गई और वर्तमान समय में यह काम औरंगाबाद बिहार के साथ बेंगलुरु में चल रहा है। कर्नाटक राज्य प्रभारी स्वरांजलि सिंह ने कहा कि ऐसे लोगों की सेवा ही सच्ची भक्ति है। संस्था भूले भटके लोगों को उनके परिजनों से मिलवाने का काम करती है। इसी क्रम में दिल्ली और हरियाणा से गुम हुए किसी व्यक्ति के परिजन, लावारिस दिव्यांग की खोज संस्था द्वारा भी कराई जा रही है। आजमगढ़ उत्तर प्रदेश की रितु कुमारी ने बताया कि सोशल साइट के माध्यम से मुझे स्वरांजलि सेवा संस्थान के बारे में जानकारी मिली। मैं इसके डायरेक्टर से फोन पर बातचीत करके अपने पिता को भी ढूंढने में मदद मांगी हूं। उम्मीद है अन्य दिव्यांग लोगों की तरह मेरे पिता को भी यह संस्था ढूंढने में हमारी मदद करेगी।

संस्था के सामाजिक एवं आध्यात्मिक कार्यों में नेपाल के धर्मपाल गुरु वशिष्ठ जी महाराज, वर्ल्ड मीडिया इन्फोटेनमेंट के फाउंडर राजेश कुमार गुप्ता,पीडीएस अध्यक्ष प्रमोद कुमार सिंह, फौजी विद्यासागर राणा, समाजसेवी नवरत्न प्रसाद ,प्रदीप कुमार, किशोर कुमार ,दीपक राम, अमेरिका वासी भक्त श्री कृष्णा पांडे ,पवन भट्टराई एवं समाजसेवी धर्मेंद्र कुमार गुप्ता आदि लोगों का सहयोग प्राप्त हो रहा है। कौन कहता है आसमान में सुराख हो नहीं सकता ,एक पत्थर जरा तबीयत से उछालो यारों । सचमुच इस उक्ति को चरितार्थ किया है सामाजिक भावना को समझने वाले इस परिवार के लोगों ने। सच्चे मन से यदि किसी कार्य की शुरुआत की जाए तो सफलता मिलती ही है।

आज स्वरांजलि सेवा संस्थान को भारत नेपाल में सामाजिक और आध्यात्मिक कार्य करने हेतु कई बड़े-बड़े सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। संस्थापक डी .आनंद ने कहा कि हमारे परिवार में होने वाला हर पारिवारिक कार्यक्रम ,इको फ्रेंडली होता है। सभी आगत अतिथियों को हम निः शुल्क औषधीय गुणों वाले पौधे प्रदान करते हैं और उन्हें पौधारोपण के लिए प्रेरित करते हैं। संस्था के कोषाध्यक्ष शिवचंद्र शर्मा, सचिव अखिलानंद ,वरिष्ठ सदस्य विजय कुमार ने संयुक्त रूप से कहा कि भविष्य में इस सामाजिक कार्यक्रम को हम और भी बड़े पैमाने पर करना चाहते हैं।

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