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नागपंचमी पर्व हमें जीवों का सम्मान करना सीखाता है-पं-भरत उपाध्याय

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विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण, बिहार


बगहा अनुमंडल अंतर्गत मधुबनी प्रखंड स्थित राजकीय कृत हरदेव प्रसाद इंटरमीडिएट कॉलेज मधुबनी के पूर्वप्राचार्य पं०भरत उपाध्याय ने बताया कि –श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को कल मंगलवार को नागपंचमी का पर्व मनाया जाएगा। प्रातः घर के देवताओं के पूजन के बाद थाली में गोबर रखकर उसमें सरसों, बालू ,फूल से मंत्रों द्वारा अभिमंत्रित कर उस गोबर से पूजा घर में और दरवाजों पर 5,7 या विशेष रूप से 9 नागों का चिन्ह बनाकर उन्हें अक्षत चंदन से पूजा कर कटहल के पत्ते पर दूध लावा अर्पित कर पूजन आरती करना है! इस दिन नागों की पूजा करने का विधान है। हिंदू धर्म में नागों को भी देवता माना गया है। महाभारत आदि ग्रंथों में नागों की उत्पत्ति के बारे में बताया गया है। इनमें शेषनाग, वासुकि, तक्षक आदि प्रमुख हैं।
जिनको कालसर्प योग है, वे नाग पंचमी के दिन पीपल के नीचे एक दोने में कच्चा दूध रखकर घी का दीपक जलाएं ।कच्चा आटा, घी और गुड़ मिलाकर एक छोटा लड्डू बना के रख दें और यह मंत्र बोलकर प्रार्थना करें। ऊं अनंताय नमः, ऊं वासुकाय नमः, ऊं शंखपालाय नमः , ऊं तक्षकाय नमः , ऊं कार्कोटकाय नमः , ऊं धनंजयाय नमः, ऊं ऐरावताय नमः , ऊं मणि भद्राय नमः, ऊं धृतराष्ट्राय नमः , ऊं कालियाये नमः इन मंत्रों से कालसर्प योग की शांति होगी।

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