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भारत बंद का दिखने लगा असर, दरंभगा में रोकी गई नमो भारत ट्रेन

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विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण 09 जुलाई बुधवार 2025-26

नई दिल्ली: देशभर के 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों के संयुक्त मंच ने आज ‘भारत बंद’ बुलाया है. यह हड़ताल केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ बुलाई गई है, जिसमें बैंकिंग, परिवहन, डाक सेवाएं, खनन, और निर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के 25 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और ग्रामीण मजदूरों के शामिल होने की उम्मीद है. यह हड़ताल केंद्र सरकार की कथित ‘मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और कॉर्पोरेट समर्थक’ नीतियों के खिलाफ एकजुटता का प्रदर्शन है. हालांकि, स्कूल, कॉलेज और प्राइवेट ऑफिसों के खुले रहने की संभावना है, लेकिन परिवहन और अन्य सेवाओं में रुकावट से रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ सकता है. उधर बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन पर सियासी घमासान जारी है. आज महागठबंधन की तरफ से बिहार बंद बुलाया गया है. इस प्रदर्शन में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव भी शामिल होंगे. राहुल गांधी बिहार बंद में मार्च का नेतृत्व करेंगे. पटना में इनकम टैक्स गोलंबर से शहीद स्मारक तक तेजस्वी यादव के साथ वह मार्च करेंगे. बिहार बंद में महागठबंधन के छह दल आरजेडी, कांग्रेस, सीपीआई , सीपीएम, माले और वीआई के अलावा पप्पू यादव का भी समर्थन हासिल है. राहुल गांधी चर्चित कारोबारी गोपाल खेमका हत्याकांड को लेकर पीड़ित परिजनों से भी मुलाकात कर सकते हैं.

बिहार में बंद का बड़ा असर, बिहिया में रोकी गई श्रमजीवी एक्सप्रेस, NH 31 पर भी चक्का जाम:

बिहार में मतदाता पुनरीक्षण अभियान के खिलाफ महागठबंधन के बंद का वहां खूब असर देखा जा रहा है. बिहिया स्टेशन पर कार्यकर्ताओं ने श्रमजीवी एक्सप्रेस को रोक दिया. उधर आरजेडी कार्यकर्ताओं ने किया NH 31 पर चक्का जाम कर दिया है. यहां बाढ़ थाना के जलगोविंद चौक को प्रदर्शनकारियों ने जाम किया.

बिहार में बंद का दिखने लगा असर, दरंभगा में रोकी गई नमो भारत ट्रेन:

बिहार के दरंभगा में बंद का असर दिखने लगा है. यहां जयनगर से पटना जाने वाली नमो भारत ट्रेन को दरभंगा रेलवे स्टेशन पर रोक दिया गया. राजद सहित महागठबंधन के कार्यकर्ताओं ने ट्रेन के आगे खड़े होकर जमकर नारेबाजी करते दिखे.

भारत बंद का आज किन सेवाओं पर पड़ेगा असर:

भारत बंद इन क्षेत्रों पर पड़ने की इस देशव्यापी हड़ताल का सबसे ज्यादा असर पड़ने की संभावना है

बैंकिंग सेक्टर: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और सहकारी बैंकों में चेक क्लीयरेंस, लोन प्रोसेसिंग, और ग्राहक सेवा में देरी हो सकती है. बीमा क्षेत्र भी प्रभावित हो सकता है.

सार्वजनिक परिवहन: पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में जहां यूनियनों का प्रभाव ज्यादा है, वहां सार्वजनिक बसें, ऑटो-रिक्शा, और ऐप-आधारित टैक्सी सेवाएं बाधित हो सकती हैं.

डाक सेवाएं: डाक वितरण और अन्य डाक सेवाओं में देरी संभव है.

खनन और औद्योगिक क्षेत्र: कोयला खनन, स्टील, और निर्माण जैसे क्षेत्रों में उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है.

रेलवे: भारतीय रेलवे ने आधिकारिक तौर पर हड़ताल में शामिल होने की घोषणा नहीं की है, लेकिन कुछ स्टेशनों पर यूनियन के विरोध प्रदर्शनों के कारण ट्रेनों में देरी हो सकती है.

स्कूल, कॉलेज, ऑफिस सब आज खुले, लेकिन…:

भारत बंद इस देशव्यापी हड़ताल के बड़े पैमाने के बावजूद, दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, और बेंगलुरु सहित कई प्रमुख शहरों में स्कूल, कॉलेज और प्राइवेट ऑफिस आज खुले रहने की उम्मीद है. किसी भी राज्य सरकार या शिक्षा विभाग ने स्कूल-कॉलेज बंद करने की कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की है. इस हड़ताल में बसों और ऑटो रिक्शा चालकों के भी शामिल होने की अनुमान है. ऐसे में लोगों को आज आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. कुछ स्कूलों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि वे अपनी जगह पर हालात को देखकर ही बच्चों को स्कूल भेजने का निर्णय लें.

आज भारत बंद में कौन-कौन शामिल है:

भारत बंद इस हड़ताल को 10 प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का समर्थन प्राप्त है, जिनमें शामिल हैं…
ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC)
इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC)
सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (CITU)
हिंद मजदूर सभा (HMS)
सेल्फ एम्प्लॉयड वीमेन्स एसोसिएशन (SEWA)
लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (LPF)
यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (UTUC)
ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (AICCTU)
ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन सेंटर (TUCC)
ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (AIUTUC) इसके अलावा, संयुक्त किसान मोर्चा और रेलवे, NMDC लिमिटेड, स्टील उद्योग, और उत्तर प्रदेश में बिजली वितरण कंपनियों के 27 लाख कर्मचारी भी इस हड़ताल में शामिल हो रहे हैं. ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (AIBEA) और बंगाल प्रोविंशियल बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन ने भी बैंकिंग और बीमा क्षेत्रों के कर्मचारियों की भागीदारी की बात कही है.

भारत बंद का मकसद और मांगें:

ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने केंद्र सरकार की नई श्रम संहिताओं, सरकारी संपत्तियों के निजीकरण, और बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ यह हड़ताल बुलाई है. यूनियनों का कहना है कि सरकार की नीतियां कर्मचारियों और किसानों के हितों को नजरअंदाज कर कॉर्पोरेट्स को फायदा पहुंचा रही हैं. इस हड़ताल को 1991 में उदारीकरण नीतियों की शुरुआत के बाद से 22वां सामान्य हड़ताल माना जा रहा है. यूनियनों ने श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया को पिछले साल 17 सूत्री मांगों का एक चार्टर सौंपा था, जिसका कोई जवाब नहीं मिला.

ये प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं…:

चार नई श्रम संहिताओं को वापस लेना
युवाओं के लिए रोजगार सृजन और सरकारी रिक्तियों को भरना
26,000 रुपये न्यूनतम वेतन की गारंटी
पुरानी पेंशन योजना की बहाली
8 घंटे के कार्यदिवस की गारंटी
MGNREGA का शहरी क्षेत्रों में विस्तार
अग्निपथ योजना को रद्द करना
हड़ताल और यूनियन बनाने के अधिकार की रक्षा
सार्वजनिक सेवाओं जैसे स्वास्थ्य और शिक्षा को मजबूत करना

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