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लाखों का प्याऊ बना शोपीस, कूड़े में सड़ रहा जनकल्याण का सपना

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नगर परिषद बगहा की घोर लापरवाही से जनता बेहाल

िजय कुमारशर्मा – बगहा पश्चिम चंपारण,बिहार
दिनांक:- 02-05-2025

गर्मी अपने चरम पर है, पारा चढ़ रहा है, लोग प्यास से बेहाल हैं—लेकिन नगर परिषद बगहा को इसकी कोई परवाह नहीं। जनहित में लाखों रुपये की लागत से खरीदे गए प्याऊ और मूत्रालय कूड़े के ढेर में दम तोड़ रहे हैं। इन्हें लगाया जाना था ताकि राहगीर, मजदूर, रिक्शावाले और गरीब तबके के लोग चिलचिलाती धूप में राहत पा सकें, लेकिन नगर परिषद की उदासीनता ने इन सुविधाओं को मज़ाक बना दिया है। न योजना का लाभ, न जवाबदेही बगहा दो प्रखंड में प्याऊ और शौचालय की यूनिट्स को सड़क किनारे या सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित किया जाना था, लेकिन इन्हें किसी कबाड़ की तरह कोने में फेंक दिया गया है। न तो इनकी देखरेख हुई, न ही इन्हें चालू किया गया। इस पूरे प्रकरण में लाखों रुपये की सरकारी राशि व्यर्थ जा रही है। स्थानीय लोगों में भारी नाराज़गी है। लोगों का कहना है कि हर साल गर्मी में पेयजल की किल्लत होती है, लेकिन इस बार उम्मीद थी कि प्याऊ से कुछ राहत मिलेगी। लेकिन अब यही प्याऊ कूड़े के ढेर में पड़ी है, और प्रशासन सो रहा है। कई नागरिकों ने मांग की है कि इस पर कड़ी जांच हो और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब करोड़ों की योजनाएं बनाई जाती हैं, तो उन पर निगरानी क्यों नहीं होती? क्यों नहीं तय होता कि जिन वस्तुओं की खरीदी की गई है, उनका उपयोग सही समय और स्थान पर हो? क्या यह सीधे तौर पर जनता के पैसों की बर्बादी नहीं है? नगर परिषद बगहा को जवाब देना होगा—क्यों जनसुविधाओं को ऐसे नजरअंदाज किया गया? और क्या जनता की प्यास बुझाना अब प्राथमिकता नहीं रही?

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