Wednesday, February 11, 2026
No menu items!
Google search engine
Home एजुकेशन विद्यालय में अंतरिक्ष विज्ञान की ओर कदम – आर्यभट्ट उपग्रह की स्वर्ण...

विद्यालय में अंतरिक्ष विज्ञान की ओर कदम – आर्यभट्ट उपग्रह की स्वर्ण जयंती पर विशेष आयोजन

0
351

रमेश ठाकुर – पश्चिम चंपारण,बिहार
19 अप्रैल 2025

आज से 50 वर्ष पहले, 19 अप्रैल 1975 को भारत ने अपने पहले उपग्रह आर्यभट्ट का सफल प्रक्षेपण किया था। इस ऐतिहासिक अवसर पर राजकीयकृत उर्दू मध्य विद्यालय नरकट घाट, गुलजारबाग, पटना में एक स्वर्ण जयंती समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में स्नातक विज्ञान शिक्षक श्री सूर्य कान्त गुप्ता ने आर्यभट्ट उपग्रह के प्रक्षेपण की 50वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में विद्यार्थियों को संबोधित किया।श्री गुप्ता ने छात्रों को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम और आर्यभट्ट के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि यह उपग्रह भारत के महान खगोलशास्त्री और गणितज्ञ, बिहारवासी आर्यभट्ट के नाम पर रखा गया था। सोवियत संघ के कॉसमॉस-3एम रॉकेट से प्रक्षेपित इस उपग्रह का वजन 360 किलोग्राम था। बंगलोर में वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम ने इसे डॉ. उडुपी रामचंद्र राव के नेतृत्व में तैयार किया था। इसका मुख्य उद्देश्य भारत को अंतरिक्ष तकनीक में आत्मनिर्भर बनाना और वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए एक मंच प्रदान करना था।

समारोह में उपस्थित प्रधानाध्यापक श्री एस इब्तेशाम हुसैन काशिफ और शिक्षक श्री शरफुद्दीन नूरी ने भी भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और इसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों को बताया कि आर्यभट्ट का सफल प्रक्षेपण भारत की अंतरिक्ष यात्रा की नींव साबित हुआ और इसने भारत को वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में स्थापित किया।आर्यभट्ट के प्रक्षेपण ने न केवल भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित किया, बल्कि यह भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास में भी एक ऐतिहासिक कदम था।यह आयोजन भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के प्रति छात्रों के बीच जागरूकता बढ़ाने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

error: Content is protected !!