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भारत की महान हस्ती डॉ भीमराव अम्बेडकर -पं-भरत उपाध्याय

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विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिम चंपारण,बिहार


जब भी भारतीय में समानता की बात आती है उसमें एक नाम बड़ा ही प्रमुखता से लिये जाता है जिसका नाम डॉ भीमराव अम्बेडर ये केवल एक नाम ही नही बल्कि भारतीय इतिहास का नायक है जो वंचितों को एक नया रास्ता दिखलाए उन्होंनो कभी भी अपने लिए नही जिया पूरे समाज की आवाज बनकर भारतीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई, डॉ अम्बेडर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश में इंदौर के ननकट महू में हुआ, सूबेदार रामजी सकपाल और भीमाबाई के यह 14 वी सन्तान बचपन से ही बुद्विमान, दृढ स्वभाव और होनहार थे, हर विषय को बहुत ही सरल ढंग से सुनना और आडम्बर का विरोध करना इस बात को दर्शाती है कि अम्बेडकर बचपन से ही सामाजिक कृतुयों के विरोधी थे। जब भी सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण की बात आती है तो उनका नाम सबसे पहले आता है और ये सच भी है चाहे मानवाधिकार की बात हो या समानता की अम्बेडकर हमेशा इस बात की वकालत की है । शिक्षा के परिपेक्ष्य में अम्बेडकर का योगदान सबसे उपर आता है उन्होंने कहा था दो रोटी कम खाओ लेकिन दो किताबें अवश्य पड़ो, शिक्षा से बड़ा को दृष्टि नहीं है और शिक्षा से ही समाज मे समानता आती है खसकर महिला शिक्षा की वकालत महिलाओं को उचित सम्मान शिक्षा से ही मिल सकता है, यदि पूरे अम्बेडकर को पढ़े तो आपको ये समझ मे आएगा कि उन्होंने कभी भी किसी खास समुदाय का न तो विरोध किया था और नही किसी खास समुदाय के लिए काम किया, उनका तो एक ही लक्ष्य था कि समाज मे समानता किस प्रकार से आये, महिलाओं को उनका हक कब मिले, वंचितों को समाज के मुख्य धारा से कैसे जोड़ा जाय उन्होंने इस तरह की भारत की परिकल्पना कि जिसमे सभी बराबर हो जहाँ जात-पात , छुआ- छूत की कोई बात न हो।
ये बात सदा सत्य है कि अम्बेडकर कभी भी एक वर्ग के बारे में नही सोचे उन्होंने देश के सामजिक बुराई को दूर करने का प्रयास किया, तो ये बात सोचने वाली है कि क्या वे केवल दलित के नेता थे मेरा मानना है कि दलित का नेता कहना अम्बेडकर के अपमान करना होगा वे तो सभी के नेता थे आज के गरीब, वंचित चाहे वो किसी जात का हो यदि किसी समानित पद पर जाता है ये अम्बेडकर की देन है , तो हम कैसे कहे कि वे केवल दलित के ही नेता थे , आज भारतीय राजनीति इतनी गिर गई है कि सत्ता के लिए राजनेता किसी भी स्तर पर जा सकते है, हमे आज अम्बेडर को पढ़ने की आवश्यकता है , अम्बेडकर के पथचिन्हों पर चलने की आवश्यकता है एक ऐसा समाज के निर्माण की आवश्यकता है जहाँ समानता हो , भाई-चारा हो ।

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